शुभ पंचांग · गृहारम्भ एवं गृह प्रवेश · स्वामी-सहस्वामी कुण्डली विचार
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गृह प्रवेश का मुहूर्त मुख्य गृहस्वामी (कर्ता) की जन्म राशि एवं जन्म नक्षत्र से देखा जाता है। सहस्वामी का विवरण भरने पर उनका तारा-बल एवं चंद्र-बल भी जुड़ता है — तथा किसी तिथि पर कर्ता का बल क्षीण हो तो उपकरण वैकल्पिक कर्ता स्वतः सुझाएगा।
अक्षांश एवं रेखांश दशमलव अंश में भरें। उत्तर अक्षांश एवं पूर्व रेखांश धनात्मक; दक्षिण एवं पश्चिम ऋणात्मक (जैसे लंदन −0.1276)। जोड़ा गया स्थान इस सत्र की समस्त सूचियों में उपलब्ध हो जाएगा। ऊपर के अक्षांश/रेखांश खाने सदैव सीधे भी भरे जा सकते हैं।
पहले स्वामी एवं सम्पत्ति टैब भरें — तभी तारा-बल, चंद्र-बल एवं गुरु-गोचर स्कोर में सम्मिलित होंगे। मुहूर्त-खिड़की केवल उसी अवधि की दी जाती है जब शुद्ध नक्षत्र, शुद्ध तिथि एवं शुभ लग्न — तीनों एक साथ चल रहे हों, तथा राहु-यम-गुलिक काल एवं भद्रा उसमें न पड़ते हों।
नीचे द्रिक पंचांग एवं कालनिर्णय-आधारित प्रकाशित गृह प्रवेश तिथियाँ (नई दिल्ली संदर्भ) दी गई हैं। उपकरण इनकी तुलना अपनी स्वतंत्र गणना से करता है — जहाँ अंतर हो, कारण भी बताता है।
यदि आवश्यक अवधि में शुद्ध मुहूर्त उपलब्ध न हो — कब्ज़ा, ऋण की किश्त, विद्यालय अथवा स्थानान्तरण की बाध्यता हो — तो शास्त्र में अनेक मान्य विकल्प हैं। अवधि भरें; उपकरण बाधा का कारण पहचानकर उसी के अनुरूप समाधान देगा।
गृहस्वामी का जन्म विवरण एवं गृह क्रमांक स्वामी एवं सम्पत्ति टैब में भरें। यहाँ मूलांक-भाग्यांक, गृह अंक, नामपट्ट अंक, प्रवेश-तिथि अंक तथा व्यक्तिगत वर्ष-मास-दिन की गणना होगी।
प्रवेश-लग्न का समय वह क्षण है जब गृहस्वामी दाहिना पैर आगे रखकर गृह में प्रथम प्रवेश करेंगे। उससे पूर्व की समस्त पूजा का उल्टा-क्रम स्वतः बनेगा।
मुख्य द्वार की दिशा एवं गृह प्रवेश का प्रकार स्वामी एवं सम्पत्ति टैब में चुनें, फिर यहाँ गणना करें।
नीचे चयन कर रिपोर्ट बनाएँ। बनने के बाद प्रिंट / PDF दबाएँ — केवल रिपोर्ट छपेगी, शेष पटल नहीं। कागज़ A4, मार्जिन सामान्य रखें।
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